Saturday, November 30, 2013

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अकार ( वर्तमान अंक-36 )
अकार -36 अब इंटरनेट पर अपलोड--

मुस्लिम रैनेसॉं पर बातचीत की श्रखला -

      'अकार' ने मुस्लिम समाज, धर्म, इतिहास, के प्रख्यात अध्येताओं से बातचीत की एक श्रृंखला शुरू की है । इसमें सबसे पहले प्रो. इरफान हबीब से की गयी विस्तृत विचारोत्तेजक बातचीत प्रस्तुत की जा रही है। उसके बाद प्रो. शम्सुर्रहमान फारूकी, प्रो. शमीम हनफी और पाकिस्तान के कुछ विशिष्ट लोग होंगे । यदि यह बातचीत, बहस आगे बढ़ी तो हम इसे विश्व के अलग अलग हिस्सों में ले जाने का प्रयास करेंगे ।........
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जीवेश प्रभाकर
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Monday, April 15, 2013

एक कहानी में पढ़ें...

लेटर-बॉक्स--अज्ञेय 
दोनों बूढ़े थे और बाल-बच्चा उनका कोई नहीं था - दो बेटे जंग में मारे गये थे जापान की तरफ़। लाहौर में आ मिलने को कह गये थे। लाहौर की तरफ़ जाते-जाते और भी कई लोग उनके साथ हो गये थे, लेकिन रास्ते में कुछ लोगों ने बन्दूकों से बहुत-सी गोलियाँ चलायीं और कुछ साथ के मारे गये - चाचा भी मर गये। पर साथियों ने रुकने नहीं दिया। बहुत जल्दी-जल्दी बढ़ते गये। लाहौर में बाबूजी के मिलने की बात थी, पर लाहौर वे लोग गये ही नहीं। रास्ते में और बहुत से लोग मिले थे, उन्होंने कहा कि लाहौर जाना ठीक नहीं इसलिए रास्ते में से मुड़ गये।
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