
इस श्रद्धाञ्जली सभा मे प्रगतिशील
लेखक संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, इप्टा
, जनवादी लेखक संघ सहित विभिन्न ट्रेड यूनियन व साहित्यिक सांस्कृतिक
संगठनों से जुड़े साथियों ने भागेदारी की । सभा मे
रायपुर के अलावा अम्बिकापुर ,बिलासपुर,कोरबा, भाटापारा,दुर्ग, भिलाई,धमतरी,राजिम,कोम्मा,राजनांदगाँव
सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न नगरों व कस्बों से बड़ी संख्या में सुधिजन शामिल हुए
।इस अवसर पर बड़ी संख्या में मित्रों ने प्रभाकर चौबे के साथ
अपनी स्मृतियां साझा करते हुए उन्हें श्रद्धाञ्जली अर्पित की ।

पत्रकारिता के साथ साथ उन्होने
साहित्य में भी काफी लिखा । उनकी प्रकाशित कृतियों में ''विज्ञानप
के बहाने'' व्यंग्य रचनाओं का संकलन ,''खेल के बाद मैदान '' कविताओ
का संकलन ,''रोजनामचा '' संपादकीय का संकलन ,''हे, विदूषक
तुम मेरे प्रिय '' व्यंग्य उपन्यास ,''गाँधी
जी मिले'' व्यंग्य संग्रह , ''अजी सुनिए'' व्यंग्य
एकांकी ''फुरसतिया चिन्तन'' व्यंग्य रचनाओं का संकलन,''यात्रा
से पहले यात्रा'' रम्य रचनाओं का संकलन , ''नई
सदी नए सवाल'' समसामयिक लेखों का संकलन, ''वापसी'' उपन्यास प्रमुख
हैं ।
श्री प्रभाकर चौबे को उनके समग्र योगदान
के लिए मुक्तिबोध सम्मान , कवि नारायण लाल परमार सम्मान , प्यारेलाल
गुप्त सम्मान ,मायाराम सुरजन लोक चेतना सम्मान
सम्मान के साथ ही अनेक अवसरों पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान व
पुरुस्कारों से विभूषित किया गया ।
हार्दिक श्रद्धा सुमन!!!
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